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महंगाई से बचाव

महंगाई से बचाव
کراچی سے تعلق رکھنے والی ایک ماں نے حکمرانوں کو اپنا بجلی کا بل اور کچن کے لئے اشیاء کی خریداری کا بل دکھا کر کچھ سوال پوچھے میں نے یہ سوال مفتاح اسماعیل کو بھیج دئیے مفتاح صاحب نے جواب بھجوا دیا ہے لیکن پہلے ایک ماں کا دکھڑا سن لیں pic.twitter.com/THahmjAjUL

विदेशी मुद्रा भंडार बस दिखाने के लिए नहीं, 'बारिश के दिनों' में इसका इस्तेमाल जरूरी: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास

RBI गवर्नर महंगाई से बचाव शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप को सही बताते हुए उसका बचाव किया है

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने शनिवार 12 नंवबर को भारतीय रुपये (Rupee) पर दबाव कम करने के लिए फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप को सही बताते हुए उसका बचाव किया। RBI गवर्नर ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) का इस्तेमाल ठीक ऐसी महंगाई से बचाव ही स्थितियों में किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक्सचेंज रेट में कोई अनुचित अस्थिरता न आए। 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में बोलते हुए शक्तिकांत दास ने कहा, "कुछ ऐसे ऑब्जर्वेशन किए थे कि RBI अपने रिजर्व का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहा है। ऐसा नहीं है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि बारिश के मौसम में हमें बचाव के लिए छाता उठाना पड़ता है। हमने ऐसे ही बारिश के दिनों में अपने रिजर्व का इस्तेमाल किया है।"

दास ने आगे कहा, "हमने रिजर्व को सिर्फ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में शोपीस के लिए नहीं इकठ्ठा किया है।" बता दें कि RBI ने डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट को रोकने के लिए हाल ही में अपने रिजर्व से काफी मात्रा में डॉलर को निकालकर उनकी बिक्री की थी।

अक्टूबर में 7% से कम रहेगी मंहगाई दर: शक्तिकांत दास

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कीमतों में बढ़ोतरी को एक बड़ी चुनौती बताते हुए शनिवार को उम्मीद जताई कि अक्टूबर में महंगाई की दर सात प्रतिशत से कम रहेगी। सितंबर में खुदरा महंगाई की महंगाई से बचाव दर बढ़कर 7.4% पर पहुंच गई थी, जबकि अगस्त में यह सात प्रतिशत पर थी। महंगाई में उछाल के पीछे कमोडिटी और एनर्जी की कीमतों में तेजी मुख्य कारण रहा है। अक्टूबर महीने के महंगाई आंकड़े सोमवार को जारी होंगे।

महंगाई अब क्यों नहीं बनता बड़ा मुद्दा

देश में महंगाई चरम पर है । पेट्रोल ,डीजल, रसोई गैस, खाने पीने की चीजों से देकर मकान बनाने की सामग्रियों की कीमतों में आग लगी हुई. आम जनता इस हालात से बुरी तरह परेशान है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतना कुछ होने के बाद भी महंगाई पर इतनी चर्चा क्यों नहीं हो रही? साल 2014 में तब के भारतीय जनता पार्टी प्रचार अभियान दल के प्रमुख नरेंद्र मोदी ने महंगाई को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ जोरदार हमले बोले थे। ऐसा माहौल बनाया कि यदि भाजपा जीती तो अच्छे दिन आयेंगे। यह नारा खूब हिट हुआ था। ऐसा माहौल बनाया गया मानो महंगाई पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगी। लेकिन अभी जो कुछ हो रहा है वह भारतीयों को परेशान करने वाला है ।
यहां बड़ा सवाल यह है कि इतना कुछ होने के बाद भी देश की राजनीतिक जमात चुप हैं। विपक्षी दल इसे बड़ा मुद्दा नहीं बना पा रहे । इसे विपक्षी कमजोरी भी कहा जा सकता है। महंगाई हमेशा से विपक्ष का बड़ा हथियार रहा है लेकिन यह पहला मौका देश में देखने को मिल रहा है जब महंगाई पर सत्ता ही हावी है। महंगाई की बात करने वालों पर सत्ता धारी दल से अधिक उसके समर्थक हावी हैं। सोशल मीडिया पर महंगाई की बात होती नहीं कि ऐसा करने वाले को ट्रोल करने लगा जाता है। गरीब को मुफ्त में राशन मिल रहा है। उसेकई और सुविधायें मिलती हैं। अमीरों के लिये महंगाई कोई मुद्दा नहीं। बचा मध्यम वर्ग। उसे कुछ नहीं मिल रहा लेकिन महंगाई का सबसे अधिक बचाव यही वर्ग करता मिलेगा । वैसे महंगाई पर बहस से अधिक कई ऐसे मुद्दे आ जाते हैं जिससे किसी को फुर्सत नहीं मिल पा रही कि महंगाई पर चर्चा करे। ऐसे मुद्दों पर होने वाली बहस अधिक सूकुन देने वाले हैं। पूरा देश अभी फिल्म कश्मीरी फाइल्स के नफा नुकसान के आकलन में व्यस्त है । दोनो ओर से तलवारें खिच गयी हैं। साल 1990 की तरह आज भी इस फिल्म को लेकर दो फाड़ साफ दिखती है। फिर महंगाई की बात करने की किसे फुर्सत है। रूस यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग भी महंगाई के मुद्दे पर हावी है। रही सही कसर पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरी कर दी है. श्रीलंका में जो कुछ हो रहा है उसकी भी चर्चा हो रही है। सारी चर्चा हो रही है, सबपर बहस किये जा रहे हैं लेकिन जिससे हमें रोज का लेने देना है और उसपर कोई चर्चा नहीं हो रही। पेट्रोल डीजल की कीमतों की बढोतरी की कोई बात करता है तो यह कहकर उसका मुंह बंद करा दिया जाता है कि जिसे पास गाड़ी नहीं वह पेट्रोल की बात करता है। भारत में डीजल की सबसे ज्यादा खपत ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर सेक्टर में होती है। दाम बढ़ने पर यही दोनों सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।महंगाई का बचाव करने वाले सोशल मीडिया पर अनेक आंकड़े गिनाने लगते हैं । पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल डीजल की कीमत पिछले 13 दिनों में लगातार बढ रही है। राजस्थान में 120 प्रति लीटर की कीमत पर पेट्रोल मिल रहा है। जमशेदपुर में पेट्रोल की कीमत 106.99 रुपये है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में 12 रु तक की और बढ़ोतरी हो सकती है।
महंगाई की चर्चा होने पर कभी मनमोहन सरकार के पेट्रोबांड की चर्चा होती है तो कभी रुस यूक्रेन युद्ध को कारण बताया जाने लगता है। आलम यह हो गया है कि पिछले 2 साल में किचन का बजट करीब 40प्रतिशत तक बढ़ चुका है यह कहां जाकर रुकेगा कह पाना मुश्किल है। इतना कुछ होने के बाद भी विपक्षी दलों के नेता घरों में बैठे हैं। इक्का दुक्का प्रदर्शन विरोध कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है। माना जाता है कि विपक्षी दल जनता के साथ खड़े होते हैं लेकिन देश में विपक्षी दल की कमजोरी का सत्ताधारी दल पूरा फायदा उठा रहा है । उसका तर्क है कि जनता कहां नाराज है? जनता ने तो चार राज्यों में भाजपा के पक्ष में ही मतदान किया है। इसका यह मतलब नहीं कि महंगाई बढ़ाने का सरकार को लाइसेंस मिल गया है। पिछले 13 दिनों में 11 बार पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ी है हर बढ़ोतरी 80 पैसे की हो रही है मानों सरकार ने कोई एक फार्मूला तय कर रखा है ।जैसी राजनीतिक शून्यता दिख रही है ,लगता नहीं कि आने वाले दिनों में आम जनमानस को कोई राहत मिलने जा रही है।

Watch: पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई से लोगों का बुरा हाल, पाक महिला ने कुछ ऐसे रो-रो कर बयां किया अपना दर्द, देखें वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में यह देखा गया है कि महिला सरकार से शिकायत करती हुई नजर आ रही है। परेशान महिला को यह कहते हुए सुना गया कि, "मुझे क्या करना चाहिए, घर का किराया, भारी बिजली बिल चुकाना, अपने बच्चों के लिए दूध और दवाएं खरीदना, अपने बच्चों को खिलाना या उन्हें मारना चाहिए?"

people bad condition due to rising inflation Pakistan karachi woman rabiya cried such way her pain see viral video | Watch: पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई से लोगों का बुरा हाल, पाक महिला ने कुछ ऐसे रो-रो कर बयां किया अपना दर्द, देखें वायरल वीडियो

फोटो सोर्स: सोशल मीडिया

Highlights पाकिस्तान के लोग इन दिनों आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई से बहुत परेशान है। ऐसे में महंगाई को लेकर एक पाकिस्तानी महिला का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला पाक पीएम शहबाज शरीफ और पीएमएल-एन नेता मरियम नवाज की खिंचाई कर रही है।

Pakistan Economy Crisis: बढ़ती महंगाई को लेकर एक पाकिस्तानी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह सामानों के दाम को लेकर सरकार की खिंचाई करते हुए नजर आ रही है।

वीडियो में महिला अपने घर के खर्चे और बढ़ती महंगाई पर बोलते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पीएमएल-एन नेता मरियम नवाज पर निशाना साध रही है। सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा महिला का यह वीडियो जमकर शेयर भी किया जा रहा है।

क्या कह रही है महिला

वीडियो के अनुसार, महिला ने अपना नाम राबिया बताया है और वह कराची की रहने वाली है। जारी वीडियो में महिला को रोते हुए देखा गया है और वह बढ़ती महंगाई से इस कदर परेशान हो गई है कि उसने वीडियो जारी कर सरकार से ही इसकी शिकायत की है।

महिला ने अपने घर के खर्चे के बिल को देखाते हुए सरकार से सवाल पूछे है। महिला ने कहा, "क्या उसे अपने बच्चों को अब और न खिलाकर उनका जीवन समाप्त कर देना चाहिए। सरकार में बैठे जिम्मेदारों को उसे बताना चाहिए कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के बाद अपने खर्चों को मैनेज कैसे किया जाए।"

ऐसे में महिला भावुक होते हुए फिर कहती है, "मुझे क्या करना चाहिए, घर का किराया, भारी बिजली बिल चुकाना, अपने बच्चों के लिए दूध और दवाएं खरीदना, अपने बच्चों को खिलाना या उन्हें मारना चाहिए?"

کراچی سے تعلق رکھنے والی ایک ماں نے حکمرانوں کو اپنا بجلی کا بل اور کچن کے لئے اشیاء کی خریداری کا بل دکھا کر کچھ سوال پوچھے میں نے یہ سوال مفتاح اسماعیل کو بھیج دئیے مفتاح صاحب نے جواب بھجوا دیا ہے لیکن پہلے ایک ماں کا دکھڑا سن لیں pic.twitter.com/THahmjAjUL

'सरकार ने गरीबों को लगभग मार डाला है'- महिला

बताया जा रहा है कि महिला के दो बेटे है जिसमे से एक की हालत खराब रही है। वह बीमार रहता है और उसे दिल के दौरे भी आते है। इस पर बोलते हुए महिला ने कहा, "एक बच्चे को दौरे पड़ रहे हैं, जबकि उसके इलाज की दवा की कीमतें पिछले चार महीनों के दौरान काफी बढ़ चुकी है। क्या मैं अपने बच्चे के लिए दवाएं खरीदने से बच सकती हूं?"

महिला ने आगे पूछा, "सरकार ने लगभग गरीब लोगों को मार डाला है. क्या आप वास्तव में खुदा से भी नहीं डरते हैं?" आपको बता दें कि इस वीडियो को पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने ट्विटर पर शेयर किया था।

वित्त मंत्री ने किया बचाव

इस वीडियो के वायरल होने के बाद वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने इस पर प्रतिक्रिया महंगाई से बचाव महंगाई से बचाव देते हुए सरकारा का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार जून महीने से बिजली के दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और न ही दवाओं पर कोई कर लगाया है।

छातों पर महंगाई की मार, बारिश से बचने जेब करनी होगी ढीली

छातों पर महंगाई की मार, बारिश से बचने जेब करनी होगी ढीली

बालोद (नईदुनिया न्यूज)। बारिश के मौसम महंगाई से बचाव की शुरूआत होते ही छाता, रेनकोट, वाहनों को ढंकने के लिए प्लास्टिक कवर, तालपत्री की मांग बढ़ जाती है। शहर में इसका लाखों रुपए का टर्नओवर होता है, लेकिन इस वर्ष बारिश से बचने के लिए उपयोग होने वाली सामग्री पर महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है। सामग्री के दाम काफी बढ़ गए हैं। चाहे छाता हो, रेनकोट हो या प्लास्टिक कवर सभी सामग्री इस समय दोगुने दामों में बिक रही है। इसके पिछे एक कारण कोरोना संक्रमण के कारण लाकडाउन को भी माना जा रहा है।

दामों में हुई 15 से 20 फीसदी वृद्घि

महंगाई का असर इन सभी सामग्री पर भी पड़ा है। काटन प्लास्टिक के अलावा आधुनिक तरीके से निर्मित रंगबिरंगी छाते सभी उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। विभिन्न डिजाइनों और रंगों के छातों को देख जब उपभोक्ता इसकी खरीदी के लिए दुकानों में पहुंचे है, तो उसके दाम सुनते ही उल्टे पैर लौट भी जाना पड़ रहा है। छातों, रेनकोट के दामों में इस वर्ष 15 से 20 प्रश की वृद्घि हुई है। छोटे रंगीन छातों के दाम साधारणतः 200 से 300 रुपये तक है। रेनकोट पन्नी वाला 200 से 250 रुपये, उच्च क्वालिटी का रेनकोट 1500 से तीन हजार रुपए में बिक रहे हैं। इस तरह बारिश के दिनों में चमड़े के जूते और चप्पल खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके चलते बारिश के दिनों तक लोग प्लास्टिक या वाटरप्रूफ जूते और चप्पल पहनना पसंद करते हैं। इस समय बाजार में इन सभी के दाम भी 150 से 300 रुपये प्रति महंगाई से बचाव जोड़ी तक पहुंच गई है।

बाजार में प्लास्टिक कवर के दाम में भी हुई बढ़ोतरी

दोपहिया वाहनों, कवेलू के छतों वाले मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को प्लास्टिक कवर की आवश्यकता रहती है। जिसे वह अपने वाहन, मकान और झोपड़ी में बारिश से बचाव के लिए इस्तेमाल करते हैं। प्लास्टिक कवर का इस्तेमाल सर्वाधिक रूप से दोपहिया, चौपहिया वाहनों को ढंकने, चाय, पानठेले तथा हाथठेले वाले अपने व्यवसाय के दृष्टि से इस्तेमाल करते हैं। बारिश लगते ही इन सभी सामग्री की आवश्यकता पड़ने लगी है। इस सामग्री के भी दाम बढ़ गए है। लोगों की जरूरत को देखते हुए शहर के मुख्य मार्केट में स्थायी दुकानों में तो यह सभी सामग्री दुकानों के सामने ही नजर आ रही है। इसके अलावा सड़क किनारे भी अस्थायी तौर पर दुकानें सजी हुई है।

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मौसम की बेरुखी ने खिंची चिंता की लकीरें

मानसून जून के पहले सप्ताह में ही पहुंच चुका है। बारिश को देखते हुए रेनकोट और छाते का बाजार भी सज गया है। शुरुआत में तो अच्छी बारिश हुई लेकिन फिर मौसम की बेरुखी ने दुकानदारों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खीच दी है। रेनकोट के साथ ही छाते के दाम में बढ़ोतरी से भी दुकानों में ग्राहकों की संख्या कम है। मानसून की बात की जाए तो प्रदेश में नौ जून को मानसून ने दस्तक जरूर दे दी है। लेकिन जिस तरह की बारिश की उम्मीद कारोबारियों को है वैसी बरसात अभी नहीं हो रही है।

महंगाई से बचाव

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बढ़ती महंगाई पर रिजर्व बैंक की एमपीसी की विशेष बैठक शुरू

बढ़ती महंगाई पर रिजर्व बैंक की एमपीसी की विशेष बैठक शुरू

नई दिल्ली/मंबई, 03 नवंबर (हि.स)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की विशेष बैठक शुरू हो गई है। आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां हो रही इस बैठक में देश में बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा होगी।

सूत्रों के मुताबिक एमपीसी की इस विशेष बैठक में तैयार रिपोर्ट सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत सौंपी जाएगी। इस बैठक में आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास के अलावा आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा और आरबीआई के कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन भी शामिल हैं।

एमपीसी की बैठक में तैयार होने वाली इस रिपोर्ट में बताया जाएगा कि इस वर्ष जनवरी से लगातार तीन तिमाहियों में वह खुदरा महंगाई दर को छह फीसदी की संतोषजनक सीमा से नीचे रखने में क्यों विफल रही है।

दरअसल, छह साल पहले एमपीसी का गठन होने के बाद पहली बार आरबीआई लगातार नौ महीनों तक महंगाई को निर्धारित दायरे में नहीं रख पाने पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा।

उल्लेखनीय है कि खाद्य पदार्थों के महंगा होने से देश में खुदरा महंगाई दर सितंबर महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 7.41 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, आरबीआई बढ़ती महंगाई को थामने के लिए लगातार नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है, लेकिन महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। इससे एक दिन पहले आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपनी नीतियों का बचाव करते हुए कहा था कि अगर समय से पहले ब्याज दरों को सख्त करना शुरू कर दिया होता तो अर्थव्यवस्था में वृद्धि नीचे की ओर मुड़ जाती।

हिन्दुस्थान समाचार/प्रजेश शंकर/दधिबल

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